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Tuesday, December 15, 2020

झाँकती साँझ

 साँझ के सङ्गी घर लौट रहे,

मैं दरकिनार बैठा दरिया हूँ।


मेरा नीर नदी ले गई,

अब मात्र बुझता ज़रिया हूँ।


जग सङ्ग रंग ख्वाब उलझाए,

यह राज क्यों जान रहा हूँ।


मैं तो कल ही बुझ चुका था,

फिर आज क्यों जाग रहा हूँ?

भरी साँझ क्यों झांक रहा हूँ?

~ (०२-०९-२०२०)


Wednesday, January 1, 2020

अन्तिम इक्कतीस

दोस्त सिटी मार गुनगुना रहे है ट्वेंटी-ट्वेंटी।
ब्लैक डॉग की सात बोतले, अब हो गई है खाली।।

मुर्गे की बांग बोलेगी, सुबह नया साल।
जिसमें होगा संकल्पित ऊर्जा का नया संचार।।

किन्तु भूल गए नशे में धुत सारे दोस्त।
जिस की बांग पर जागना था सुबह,
उसी को रात गटक गए चारों दोस्त।।

Thursday, December 19, 2019

हॉस्टल लाइफ

• गोलमटोल सपनों की धुँधली दोस्त होती है हॉस्टल लाइफ
• बिन होश, जोश उगलती खरी डोर होती है हॉस्टल लाइफ
• सर्द महीनों सी उगती, छटकती धूप होती है हॉस्टल लाइफ
• सैकड़ों छुपे अरमानों को पंख बाँटती है हॉस्टल लाइफ
• सहमी सोच को बुलंद कण्ठ सौंपती है हॉस्टल लाइफ
• एक कदम पीछे सैकड़ों सिर जोड़ती है हॉस्टल लाइफ
• थाली के सातों कवे, एक साथ गटकती है हॉस्टल लाइफ
• तूं-तड़ाक से सभ्य-बोल, बुलवाती है हॉस्टल लाइफ
• बिखरे मनकों से अटूट माला बुनती है हॉस्टल लाइफ
• रूठे सपनों के नाम मंजिल ढूँढती है हॉस्टल लाइफ
• नन्हें कदमों से अजय-धावक पछाड़ती है हॉस्टल लाइफ
• "इनशॉर्ट, बालक को समाज बनाती है हॉस्टल लाइफ"