Saturday, July 27, 2019

हाउड़ो

यह रेगिस्तान में प्रयुक्त होने वाला एक विशिष्ट शब्द है। जिसका उपयोग शिशु को आवश्यक व अनावश्यक कार्यों को रोकने या करवाने हेतु प्रयुक्त किया जाता हैं।
यह शब्द शिशुओं की खुशी, जिज्ञासा, इच्छा, क्रियाशीलता, उत्सुकता व अधिगम को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता हैं। हाउड़े (एक काल्पनिक, काली-डरावनी शक्ति) का डर फैलाकर, बच्चे के व्यवहारिक अधिगम की ओर बढ़ते कदमों को पीछे खींचा जाता हैं। जिससे सभी जाने-अनजाने में अनजान बनते हैं। बस अपना काम निकालने के चक्कर में, वे बच्चे के मन में उम्रभर के लिए, एक डर पैदा कर देते हैं।
शैशवावस्था में शिशु अपने माता-पिता, रिलेटिव्स, परिवार या समाज के व्यक्तियों में से हाउड़े का जिक्र जरूर सुनता हैं। और उसे सच मानता हैं, क्योंकि यह इस अवस्था की एक अनुकरण-अधिगम विशेषता हैं। और एक अनजान,अज्ञात डर का ता-उम्र के लिए शिकार हो जाता हैं। प्रायः इसी डर के शिकार की वजह से बच्चे भूत, प्रेत, आत्माओं को भी मानने लग जाते हैं। जिसका खामियाजा उन्हें पूरी उम्र चुकाना पड़ता हैं।
वास्तविकता में, हाउड़े शब्द की कोई सत्यता नहीं होती हैं। यह महज एक वहम और काल्पनिक मनोदशा होती हैं। जिसका शिकार कुपोषण से कई ज्यादा घातक होता है।

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